सआईएस के आतंकियों ने जारी की 'किल लिस्ट', सूची में 285          भारतीयों के नामईए





आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के कैलिफेट साइबर आर्मी (सीसीए) ने एक 'किल लिस्ट' जारी की है।

 इस सूची indian सहित दुनिया भर के 4000 से ज्यादा लोगों के नाम हैं। में 285 indian

इस सूची के बाहर आने पर खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।




NSG सदस्यता : भारत के बढ़ते दबदबे से घबड़ाया चीन      

                                     
              भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य बन पाता है कि नहीं इस पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं। चीन ने कहा है कि सियोल में होने वाली इस अहम बैठक में भारत की सदस्यता का मुद्दा एनएसजी के एजेंडे में शामिल नहीं है। भारत की सदस्यता को लेकर चीन ने न तो 'हां' कहां है और न ही 'ना'। उसने सैद्धांतिक रूप से विरोध भी नहीं किया है लेकिन उसके इस बयान से साफ है कि वह अभी एनएसजी में भारत को शामिल होते नहीं देखना चाहता। वह भारत की सदस्यता मसले को लटकाना चाहता है। चीन ने अपना सुर नहीं बदला तो भारत को एनएसजी की सदस्यता नहीं मिल पाएगी क्योंकि 48 देशों का समूह आम राय के सिद्धांत पर काम करता है जिसका चीन भी एक सदस्य है। भारत इस प्रतिष्ठित समूह में शामिल हो इसके लिए जरूरी है कि सभी 48 देशों के बीच आम सहमति बने।                                                        अभी हालात यह है कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस समेत इस समूह के ज्यादातर ताकतवर देश भारत को एनएसजी में शामिल करने के लिए अपना समर्थन दे चुके हैं जबकि चीन, टर्की, ऑस्ट्रिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों का कहना है कि समूह में नए सदस्य को शामिल करने के जो तय मापदंड और प्रक्रियाएं हैं उनका पालन किया जाए। ऐसे में समूह के ज्यादातर ताकतवर देशों का समर्थन हासिल होने के बावजूद भारत ने इन देशों को अपने भरोसे में नहीं लिया तो उसकी एनएसजी सदस्यता की राह में मुश्किलें आएंगी। एनएसजी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा चीन है जो चाहता है कि भारत के साथ पाकिस्तान को भी इस समूह में शामिल किया जाए। ऐसे में चीन से कूटनीतिक रूप से निपटना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। 

इस सप्ताह की शुरुआत में चीन के आधिकारिक मीडिया ने कहा था कि भारत को एनएसजी की सदस्यता मिलने से चीन के राष्ट्रीय हित ‘खतरे में पड़' जाएंगे और साथ ही साथ यह पाकिस्तान की एक ‘दुखती रग' को भी छेड़ देगा। चीनी विदेश मंत्रालय ने एक सप्ताह पहले ही एनपीटी पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों को शामिल किए जाने के मुद्दे पर एनएसजी के सदस्यों के ‘अब भी बंटे होने' की बात कहते हुए इसपर ‘पूर्ण चर्चा' का आह्वान किया।
दरअसल, चीन कभी नहीं चाहेगा कि भारत एक बड़ी ताकत के रूप में दुनिया के सामने उभरे। एनएसजी की सदस्यता मिल जाने पर भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश का आधिकारिक दर्जा मिलने के साथ ही वैश्विक स्तर पर नई दिल्ली के रुतबे में वृद्धि होगी। वह भारत का सीधे तौर पर विरोध तो नहीं कर पा रहा लेकिन कभी पाकिस्तान तो कभी मानक, प्रक्रियाओं का हवाला देकर सदस्यता के मुद्दे को लटकाना चाहता है। 
चीन का कहना है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए इस पर अभी सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श किए जाने की जरूरत है। चीना का कहना है कि यदि गैर-एनपीटी देश को सदस्य बनाने की ऐसी कोई व्यवस्था बनती है तो उसमें भारत के साथ पाकिस्तान को भी जगह मिलनी चाहिए। जबकि भारत का तर्क है कि फ्रांस ने भी एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं फिर भी वह एनएसजी का सदस्य है।   

      
नई दिल्ली: भारत आज मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) में औपचारिक तौर पर शामिल हो जाएगा। दुनिया के चार महत्वपूर्ण परमाणु टेक्नोलॉजी निर्यात करने वाले खास देशों के समूह में एमटीसीआर अहम है। परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) में शामिल होने की हालिया कोशिश की नाकामी बाद इसे बेहतर माना जा रहा है।
एमटीसीआर में भारत की सदस्यता किसी भी बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में भारत का पहला प्रवेश होगा। एमटीसीआर में शामिल हो जाने के बाद आने वाले समय में भारत रूस के साथ मिलकर बनाई गई सुपरक्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को अन्य देशों को बेच सकेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि हमने पिछले साल एमटीसीआर की सदस्यता के लिए आवेदन किया था और सारी प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। कल विदेश सचिव एस जयशंकर फ्रांस, नीदरलैंड और लक्जमबर्ग के राजदूतों की मौजूदगी में एमटीसीआर में शामिल होने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगे।

उल्लेखनीय है कि चीन जिसने हाल में संपन्न 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की पूर्ण सत्र की बैठक में भारत के प्रवेश की राह में रोड़ा अटकाया वह 34 सदस्यीय एमटीसीआर का सदस्य नहीं है। चूंकि, भारत का असैन्य परमाणु करार अमेरिका के साथ है इसलिए वह एनएसजी, एमटीसीआर, ऑस्ट्रेलिया समूह और वेसेनार अरेंजमेंट जैसे निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में शामिल होने का प्रयास कर रहा है। ये समूह पारंपरिक, परमाणु, जैविक और रासायनिक हथियारों और प्रौद्योगिकी का नियमन करते हैं।
एमटीसीआर में भारत के मामले का पिछले साल इटली ने विरोध किया था। वह मरीन विवाद को लेकर भारत से नाखुश था। हालांकि, केरल तट से दूर दो मछुआरों की हत्या के आरोपी दो इतालवी मरीनों को अपने मुल्क वापस लौटने की अनुमति देने के बाद इटली ने अपने विरोध के स्वर को नरम कर लिया। एमटीसीआर में प्रवेश के भारत के प्रयासों को तब प्रोत्साहन मिला जब उसने इस महीने की शुरुआत में हेग आचार संहिता का हिस्सा बनने पर सहमति जताई। एमटीसीआर की सदस्यता से भारत उच्चस्तरीय मिसाइल प्रौद्योगिकी की खरीद करने में सक्षम होगा और रूस के साथ इसके संयुक्त उपक्रम को भी बढ़ावा मिलेगा।





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